डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों के साथ किस तरीके का व्यवहार करना चाहिए? इसके लक्षणों के बारे में जानें डॉक्टर से!
आम तौर पर, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि आज के समय में बच्चे कई ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिस के होने पर उनको कई तरह कि परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिस में डाउन सिंड्रोम जैसी समस्या भी शामिल है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि डाउन सिंड्रोम बच्चों में एक इस तरह की स्थिति है, जिस में बच्चों का न केवल मानसिक विकास, बल्कि उनका शारीरिक विकास भी आम बच्चों की तरह बिल्कुल भी नहीं हो पाता है। इसके इलावा, इस तरह कि समस्या से पीड़ित बच्चों का दिमाग भी आम बच्चों कि तरह काम या फिर किसी भी चीज को अच्छे तरीके से सोच नहीं पाता है। हालांकि, आम तौर पर, कभी- कभार इन बच्चों की पर्सनैलिटी में आपको कुछ दिक्कतें नज़र आ सकती हैं, पर इस तरह की स्थिति के दौरान प्यार और काफी ज्यादा अच्छी देखभाल से ऐसों बच्चों को एक आम जिन्दी जीने में काफी ज्यादा मदद प्रदान की जा सकती है। दरअसल, क्रोमोसोम को डाउन सिंड्रोम का कारण माना जाता है, जिसका मूल कारण कोशिकाओं यानी कि सेल्स का एबनॉर्मल डिवीजन है, जो एम्ब्रियो के शुरुआती विकास के दौरान होता है।
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि एक होने वाला बच्चा अपने माता-पिता से कुल 46 क्रोमोसोम प्राप्त करता है, जिसमें से 23 क्रोमोसोम पिता के होते हैं और 23 ही माँ के होते हैं। आम तौर पर, हर एक क्रोमोसोम डीएनए को पैदा करता है, जिसको जीन के नाम से जाना जाता है। हालांकि, आपको बता दें, कि दरअसल जीन ही यह तय करते हैं, कि होने वाले बच्चे का शारीरिक और दिमागी विकास किस तरीके से होगा, पर डाउन सिंड्रोम वाले भ्रूण में एक ज्यादा, या फिर एबनॉर्मल क्रोमोसोम मौजूद होता है। आम तौर पर, एक यही एक्स्ट्रा क्रोमोसोम जेनेटिक मटीरियल बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को बदल कर रख देता है। इस तरह की स्थिति के दौरान डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों के साथ धैर्यपूर्ण, रिस्पेक्टफुल और जैसा आप आम बच्चों के साथ वर्ताव करते हैं, दरअसल आपको उनके साथ भी आम वर्ताव करना चाहिए, उनको इस समस्या के दौरान ख़ास न समझ कर दूसरे बच्चों की तरह की समझना चाहिए, उनसे मुंह नहीं मोड़ना चाहिए, किसी भी चीज के लिए सीधे उन्हीं से बात करनी चाहिए, उनके सामने साफ और आसान भाषा का ही उपयोग करना चाहिए और साथ में उनकी आज़ादी और फैसले लेने की काबिलियत को बढ़ावा देना चाहिए। इसके अलावा, इस तरह की स्थिति के दौरान आपको इस समस्या से पीड़ित बच्चे की काफी अच्छे से देखभाल करनी चाहिए। साथ में, उन को कभी भी दूसरों से अलग नहीं समझना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
इसके लक्षण क्या हो सकते हैं?
आम तौर पर, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि ज्यादातर डाउन सिंड्रोम जैसी समस्या के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं, कि कितने सेल्स में एक्स्ट्रा या फिर एबनॉर्मल क्रोमोसोम मौजूद हैं। दरअसल, डाउन सिंड्रोम जैसी समस्या से पीड़ित बच्चों में आपको अलग-अलग तरह के लक्षण नज़र आ सकते हैं, जिसमें से कुछ लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि
- बच्चे के चेहरे की बनावट में काफी ज्यादा बदलाव होना।
- चेहरा चपटा होना।
- आंखों का ऊपर की तरफ झुका हुआ होना।
- गर्दन का काफी ज्यादा छोटा होना।
- जीभ में असामान्यता दिखाई देना।
- हथेली में एक गहरी लकीर दिखाई देना।
- मांसपेशियों में काफी ज्यादा कमजोरी होना।
इस समस्या का कैसे पता लगाया जा सकता है?
हालांकि, आम तौर पर इस तरह की समस्या का पता करने के लिए आप गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड और कुछ ब्लड टेस्ट करवा सकते हैं। इसके अलावा, जेनेटिक टेस्ट कैरियोटाइपिंग भी कराए जा सकते हैं। पर, इस तरह की स्थिति के दौरान चिंता की बात यह है, कि डाउन सिंड्रोम जैसी समस्या का जड़ से इलाज करने के लिए या फिर समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है। आम तौर पर, समस्या के कुछ लक्षणों का इलाज दवाओं के माध्यम से किया जा सकता है, जिसमें समस्या के दौरान दौरे पड़ने के लक्षण शामिल होते हैं। इसके अलावा, इस तरह की समस्या से पीड़ित बच्चों की काउंसलिंग की जाती है और उनको बिहेवियरल थेरेपी से आराम प्रदान किया जाता है।
इस समस्या में पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?
- इस समस्या के दौरान सबसे पहले माता-पिता को बच्चे की इस स्थिति को अपनाना चाहिए और बिल्कुल भी निराश नहीं होना चाहिए।
- इस दौरान किसी भी हालत में खुद को दोषी या फिर गिल्टी महसूस नहीं करना चाहिए।
- इस स्थिति के दौरान बच्चे की इस हालत को लेकर अपने मन में किसी भी तरह की कोई भी अपराध की भावना न आने दें।
- दरअसल, इस तरह की समस्या के चमत्कारी इलाज के दावों के झांसे में बिल्कुल भी न पड़ें।
- अपने अगले बच्चे को डाउन सिंड्रोम जैसी समस्या होने से बचाने के लिए आपको तुरंत किसी जेनेटिक काउंसलर से सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष: इस लेख के माध्यम से हम ने आपको डाउन सिंड्रोम और इस तरह की स्थिति के दौरान आपको इस समस्या से पीड़ित बच्चों के साथ कैसा वर्ताव करना चाहिए इसके बारे में बताया गया है। इस से ऐसे बच्चों की हालत में सुधार किया जा सकता है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही मानस अस्पताल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।