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अच्छे साइकेट्रिस्ट का कर चुनाव मानसिक रोग से पाए निजात

मानसिक रोग: लक्षण और इलाज कब देते हैं थेरेपी और काउंसलिंग?

January 4, 2024

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मानसिक रोग किसे कहा जाता हैं ?

 मानसिक रोग हमारे शरीर के विकारो में से एक है। जो यदि हमारे शरीर में उत्पन हो जाए तो व्यक्ति का जीना मुश्किल कर देती हैं।

तो वही यदि ये रोग उत्पन हो जाए तो व्यक्ति का दिमाग उसके काबू में नहीं रहता जिसकी वजह से उसके रोजमर्रा के कार्य असफल ही रह जाते हैं।

लक्षण क्या हैं इस बीमारी के ?

 ० गतिविधियों को दोहराना।

० अगर आपको याद नहीं कि आप आखिरी बार खुश कब थे।

० आप लोगों से कटने लगे हैं।

० आप खुद से नफरत करते हैं और अपने आप को खत्म कर लेना चाहते हैं।

० इन सब के इलावा ऑनलाइन प्लेटफार्म पर खुदखुशी के तरीको को ढूंढ़ना।

आप मानसिक रोग के लक्षणों को देखते हुए बेस्ट साइकेट्रिस्ट लुधियाना से इसके बारे में जानकारी ले सकते है।

मानसिक बीमारी किस उम्र में होती है?

मानसिक बीमारी के समय की अगर बात करें तो कोई भी उम्र या समय इसके लिए निर्धारित नहीं हैं। मानसिक बीमारी के प्रभाव अस्थायी या लंबे समय तक चलने वाले हो सकते हैं। आपको एक ही समय में एक से अधिक मानसिक स्वास्थ्य विकार भी हो सकते हैं।

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यदि सही समय पर लक्षणों को देखते हुए आपको इस बीमारी का पता चल गया है तो किसी अच्छे हॉस्पिटल का चुनाव करे। तो वही मानस हॉस्पिटल में भी मानसिक रोग से ग्रस्त रोगियों का इलाज बेहतरीन उपकरणों के साथ किया जाता हैं।

इलाज क्या है मानसिक रोग से बचने का ?

 इस रोग से निजात पाने के लिए दो तरीके कारगर माने जाते हैं। जैसे,.,

  • न्यूरोटिक डिसऑर्डर:
  • साइकोटिक डिसऑर्डर:
  • न्यूरोटिक डिसऑर्डर, एक ऐसी बीमारी हैं जिनमें मरीज खुद कह सकता है कि वह बीमार है यानी उसे अपनी बीमारी का पता होता है। वह उदास होता है या चिंतित होता है। इस चिंतन की वजह से उसकी रुटीन पूरी तरह खराब हो जाती है।
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मानसिक रोग से ग्रस्त मरीज़ो को निजात दिलवाने के लिए काउंसलिंग और थेरपी का उपयोग किया जाता हैं।

  • तो वही साइकोटिक डिसऑर्डर, से ग्रस्त मरीज़ो का नाता असलियत से टूट जाता है। वे अपनी ही कल्पना की दुनिया में रहते हैं। ऐसे मरीज को यह पता नहीं होता कि वह बीमार है। लेकिन हां, उनके साथ रहनेवालों या फिर बात करने वालों को इस बात का जरूर पता चल जाता हैं।

तो वही इस बीमारी के अन्य इलाज भी है जैसे थेरपी और काउंसलिंग,,,

यदि व्यक्ति निगेटिव सोच से पीड़ित है, बिना खतरे वाली बातों पर भी बहुत घबरा जाता है तो फिर थेरपी की जरूरत उसे पड़ सकती है। गंभीर डिप्रेशन, एंग्जायटी डिसऑर्डर आदि के मामलों में थेरपी बहुत कारगर मानी जाती है।

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काउंसलिंग की बात करें तो यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि काउंसलिंग देने का फायदा व्यक्ति को तभी होता है जब मरीज काउंसलर की बातों को समझने और अपनाने में सक्षम हो। मतलब मरीज़ को अपनी परेशानी का पता होना चाहिए। अगर ऐसी स्थिति न हो तो थेरपी ही कारगर होती है जिसमें दवाओं के बाद या फिर साथ में काउंसलिंग की जाती है।

तो वही इस रोग का आप इलाज ढूंढ रहे हो तो मानसिक रोग विशेषज्ञ पंजाब से आप सलाह ले सकते हो, इसके बारे में।

निष्कर्ष :

उपरोक्त लेखन में प्रस्तुत बातो को ध्यान में रखते हुए आप अपना और अपनों का बहुत ध्यान रखे। और समय रहते ही अगर इस बीमारी का पता चल जाए तो डॉक्टर से जरूर सलाह ले। क्युकि एकमात्र छोटी सलाह आपकी ज़िन्दगी में ढेर सारी खुशियां भर सकता हैं।