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मानसिक स्वास्थ्य से जुडी किन बातों के बारे में आपको पता होना चाहिए ?

April 27, 2024

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मानसिक स्वास्थ्य का ख़राब होना हमारे शरीर के लिए काफी नुकसानदायक है। क्युकी दिमाग ही हमारे शरीर के सम्पूर्ण कार्य को करने की इजाज़त देते है। और अगर कही ये भी ख़राब हो जाए तो इसका असर हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को बिगाड़ कर रख देते है। तो चलिए आज के लेख के माध्यम से जानने की कोशिश करते है की आखिर क्या है मानसिक स्वास्थ्य से जुडी समस्याएं ;

मानसिक स्वास्थ्य क्या है ?

  • किसी भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध उसकी भावनात्मक (इमोशनल), मनोवैज्ञानिक (साइकोलॉजिकल) और सामाजिक (सोशल) स्थिति से जुड़ा होता है। मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के सोचने, समझने, महसूस करने और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करते है। जिसका सीधा असर व्यक्ति के तनाव को संभालने और जीवन से जुड़े जरूरी विकल्प के चयन पर भी पड़ सकता है। 
  • मानसिक स्वास्थ्य जीवन के प्रत्येक चरण अर्थात बचपन, किशोरावस्था, वयस्कता और बुढ़ापे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। 
  • मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का एहसास होता है। इस स्थिति में व्यक्ति दूसरों के साथ सकारात्मक तरीके से बातचीत कर सकता है। साथ ही तनाव की समस्या से निपटने की क्षमता भी रखता है।

मानसिक स्वास्थ्य शरीर के किन कार्यो को करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है ? 

  • तनाव से जूझने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। 
  • शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में भी खास भूमिका निभाते है। 
  • लोगों से अच्छे संबंध बनाए रखने में। 
  • सामाजिक कार्य करने में योगदान देते है। 
  • प्रोडक्टीव काम करने में भी मददगार साबित होते है। 
  • अपनी क्षमता को जानने को कोशिश करना। 
  • स्ट्रोक, टाइप 2 मधुमेह और हृदय रोग के जोखिम से बचने के लिए मानसिक स्वास्थ्य खास भूमिका निभाते है। 

अगर आपके शरीर के कुछ हिस्से ठीक से कार्य करने में असमर्थ है या आपका शरीर उपरोक्त के कार्य को ठीक से करने में असमर्थ है, तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में मानसिक रोग विशेषज्ञ का चयन करना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य में किस तरह की समस्याएं देखने को मिलती है ? 

चिंता (एंग्जायटी) : 

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी एक विकार चिंता भी है। चिंता के कारण वास्तविक या काल्पनिक स्थितियों में अत्यधिक चिंता या भय की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

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अवसाद (डिप्रेशन) : 

यह मानसिक समस्या सामान्य उदासी या दुख से अलग होती है। इसमें व्यक्ति को काफी दुख, क्रोध, निराश या फ्रस्टेशन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर : 

बाइपोलर विकार को पहले मैनिक डिप्रेशन कहा जाता था। इस समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को बारी-बारी से मेनिया (असामान्य रूप से भावनाओं को प्रकट करना) और अवसाद की समस्या का सामना करना पड़ता है।

ईटिंग डिसऑर्डर :

यह विकार भोजन और शरीर की छवि से संबंधित समस्या है। इस समस्या में व्यक्ति बहुत कम खाता है या फिर जरूरत से ज्यादा खाने लगता है।

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर :

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी यह विकार ऐसी घटनाओं के बाद उत्पन्न होता है, जिसकी कभी आशा न की गई हो। इसमें किसी तरह की लड़ाई, किसी अपने की मृत्यु या गंभीर दुर्घटना शामिल है। इस समस्या की चपेट में आने वाला व्यक्ति तनाव और डर को महसूस कर सकता है।

सिजोफ्रेनिया और सायकोटिक विकार : 

यह एक गंभीर मानसिक रोग है। इसमें लोग ऐसी चीजों को देखने, सुनने और विश्वास करने लगते है, जो वास्तविक में है ही नहीं।

अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) : 

यह बच्चों में पाए जाने वाले सबसे आम मानसिक विकारों में से एक है। इस समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को अपने व्यवहार को नियंत्रित रखने में परेशानी होती है।

एडिक्टिव डिसऑर्डर : 

इस मानसिक समस्या के अंतर्गत व्यक्ति को शराब या ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों की लत लग सकती है। इस लत के कारण व्यक्ति की जान को भी जोखिम हो जाता है।

पर्सनालिटी डिसऑर्डर : 

इस स्थिति में व्यक्ति की पर्सनालिटी यानी बिहेवियर में पूरी तरह बदलाव हो जाता है। इससे व्यक्ति के सोचने-समझने, खाने-पीने और सोने के समय में भी बदलाव होता है, जिसका असर व्यक्ति के रिश्तों पर भी पड़ सकता है। इससे व्यक्ति को तनाव होने का भी भय होता है। 

अगर आप इस तरह के मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना कर रहें है, तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में मानसिक रोग विशेषज्ञ का चयन करना चाहिए।  

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मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने के दौरान किस तरह के लक्षण नज़र आते है ?

  • खाने या सोने की आदतों में बदलाव का आना। 
  • पसंदीद लोगों और गतिविधियों से दूरी बना कर रखना। 
  • ऊर्जा हीन या लो एनर्जी का एहसास होना।
  • सुन्न महसूस करना जैसे कि कुछ भी मायने नहीं रखता हो। 
  • अजीब सा दर्द महसूस होना। 
  • असहाय या निराश महसूस करना। 
  • धूम्रपान, शराब पीना और ड्रग्स का अधिक उपयोग करना। 
  • कन्फ्यूज्ड होना, चीजों को भूलना और बहुत गुस्से का आना। 
  • परेशान, चिंतित या डरा हुआ महसूस करना। 
  • मूड स्विंग्स के कारण रिश्तों में दरार का पड़ना। 
  • दिमाग में बार-बार उन यादों का आना, जिन्हें भूलना चाह रहे है, आदि।

मानसिक स्वास्थ्य को कैसे बेहतर बनाए ?

  • व्यायाम (एक्सरसाइज) भी बेहतरीन विकल्प है, आपको आपकी परेशानी से बाहर निकालने के लिए।
  • मेडिटेशन का सहारा भी आप लें सकते है। 
  • रिलैक्सेशन तकनीक का चयन आपको करना चाहिए। और इसको कैसे करना है इसके बारे में आप डॉक्टर से भी सलाह लें सकते है।
  • मानसिक रूप से परेशान होने पर आपको लिखना शुरू करना चाहिए। 
  • टाइम मैनेजमेंट स्ट्रेटेजीज को अच्छे से बनाकर रखना। 
  • अरोमाथेरेपी (लैवेंडर तेल) मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन है। 
  • कैनाबिडियोल ऑयल का सेवन करना। 
  • हर्बल-टी भी आपके मानसिक स्वास्थ्य को काफी बेहतर बन कर रखने में मददगार साबित होते है।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड भी आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना कर रखने में काफी मददगार साबित होते है।
  • माका रूट भी आपके मासिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर रखते है। 
  • दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताना। 
  • पेट्स के साथ समय बिताना। 

मानसिक स्वास्थ्य का इलाज कैसे किया जा सकता है ?

  • मानसिक रोग का सामना कर रहें लोगों को मनोचिकित्सा का सहारा लेना चाहिए, क्युकि ऐसी स्थिति से वो ही व्यक्ति को बाहर निकाल सकते है। 

वहीं मनोचिकित्सा मरीज का इलाज निम्न तरह से करते है ;

  • कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी :

इस थेरेपी की बात करें तो इसमें व्यक्ति के बर्ताव और भावनाओं को समझा जाता है और उसी के अनुसार समस्या का समाधान किया जाता है।

  • सिस्टमिक थेरेपी :
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इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर एक सिस्टम तैयार करते है, जिसमें रोगी के परिवार के लोगों को शामिल किया जाता है। उसके बाद किसी स्थिति या फिर धारणाओं के बारे में उन्हें चर्चा करने के लिए कहा जाता है। इस थेरेपी से यह समझा जाता है कि सब लोग आपस में किस तरह से संवाद करते है। साथ ही परिवार संबंधी विवाद को भी सुलझाया जाता है।

  • पर्सन सेंटर्ड थेरेपी : 

इस थेरेपी में व्यक्ति के पर्सनल अप्रोच के आधार पर इलाज की प्रक्रिया को निर्धारित किया जाता है।

  • चिंता (एंग्जायटी) : 

इस इलाज की प्रक्रिया के दौरान ब्रेन केमिस्ट्री में बदलाव किया जाता, जिससे कि अवसाद और सायकोटिक लक्षण में सुधार पाया जाता है। यह प्रक्रिया गंभीर अवसाद से गुजर रहे लोगों को ही कराने की सलाह दी जाती है।

  • ट्रांसक्रेनियल मेग्नेटिक स्टिम्युलेशन :

इस थेरेपी के माध्यम से मस्तिष्क के नर्व सेल्स को उत्तेजित किया जाता है, जिससे अवसाद के लक्षण कम हो सकते है। 

  • इसके अलावा डॉक्टर आपका इलाज कुछ मेडिकेशन या दवाइयों की मदद से भी करते है।

सुझाव :

अगर आप मासिक स्वास्थ्य संबंधी किसी भी तरह की समस्या का सामना कर रहीं है, तो इससे बचाव के लिए आपको अपनी जीवनशैली के साथ अपने स्वास्थ्य का भी खास ध्यान रखना चाहिए। 

और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर होने पर आपको मानस हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए, क्युकि इस हॉस्पिटल में मानसिक रोग की समस्या का सामना करने वालें लोगों का इलाज काफी अच्छे से किया जाता है। 

निष्कर्ष :

मानसिक तौर पर बीमार लोगों का इलाज समय पर करवाना बहुत जरूरी है, क्युकी स्थिति गंभीर होने पर आपको बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं अगर आपको पता चल गया है की कोई मानसिक रूप से परेशान है तो इससे बचाव के लिए आपको उसका खास ध्यान रखना चाहिए और किसी भी तरह की समस्या आने आपको डॉक्टर का चयन करना। और ध्यान रहें ऐसे रोगी को किसी भी तरह की दवाई को देने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह लें।