क्या बच्चों में दिखाई देने वाले ये 4 लक्षण हो सकते हैं एडीएचडी का संकेत? माता-पिता भूलकर भी न करें इन्हें नज़रअंदाज़
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी होने के कारण, ज्यादातर माता-पिता अपने काम में ही व्यस्त रहते हैं और इस सब के चलते वह अपने बच्चों कि सेहत पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पाते हैं और ऐसी कई समस्याएं होती हैं, जिनको वो नज़रअंदाज कर देते हैं, या फिर ध्यान देना जरूरी नहीं समझते हैं। ऐसे में क्या आपका बच्चा बहुत ही ज्यादा एक्टिव रहता है, या फिर उसको चीजों को समझने में काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है? तो कि यह एक अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है, जिसकी पहचान कर तुरंत समाधान करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
ज्यादातर आज के समय में, बहुत से बच्चों में अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर यानी कि ध्यान केंद्रित करने में कमी और अतिसक्रियता विकार देखने को मिलता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि यह एक न्यूरो डेवलपमेंट यानी कि दिमाग के विकास से जुड़ी हुई एक बीमारी है, जो ज्यादातर छोटे बच्चों में देखने को मिलती है। आम तौर पर, ज्यादातर छोटे बच्चों की बहुत जल्दी ध्यान भटकने या फिर शरारत करने की आदत होती है, पर जब यही आदतें लगातार और गहराई से उनकी पढ़ाई, व्यवहार, काम और रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरीके से प्रभावित करने लगें, तो यह एडीएचडी यानी कि अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है। दरअसल, छोटे बच्चों में ऐसे कई लक्षण देखने को मिल सकते हैं, जो एडीएचडी जैसी समस्या का संकेत दे सकते हैं, जिसमें ध्यान न लगना और जल्दी भटक जाना, हाइपरएक्टिविटी होना, इम्पल्सिव बिहेवियर होना, भावनात्मक असंतुलन होना, पढ़ाई और दोस्ती में चुनौतियां होना आदि जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
बच्चों में दिखाई देने वाले ये 4 लक्षण देते हैं एडीएचडी का संकेत?
दरअसल, बच्चों में एडीएचडी जैसी बीमारी का संकेत देने वाले लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि
- ध्यान न लगना और जल्दी भटक जाना
आम तौर पर, एडीएचडी जैसी बीमारी से पीड़ित बच्चों को किसी भी काम में या फिर पढ़ाई में लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने में काफी ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। दरअसल ऐसे बच्चे अक्सर अपनी चीजों को इधर-उधर रखकर भूल जाते हैं, कोई भी बात करते समय ज़ोन आउट हो जाते हैं और अपने किसी भी काम को अधूरा छोड़ देते हैं। आम तौर पर, आगे चलकर यही आदतें उनके रोजमर्रा के कामकाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा बन जाती हैं।
- हाइपरएक्टिविटी होना
दरअसल, इस समस्या से पीड़त बच्चे ज्यादातर चंचल और काफी ज्यादा बेचैन दिखाई देते हैं। आम तौर पर, ऐसे बच्चे न केवल क्लास में, बल्कि किसी शांत जगह पर भी बार-बार हिलते-डुलते, भागते-दौड़ते, या फिर फिजूल में उठते-बैठते नज़र आते हैं। दरअसल, कई बार वह ऐसे वक्त पर भी जैसे कार में या फिर फिल्म देखते समय ज्यादा शोर करने लग जाते हैं, जबकि उनको इस दौरान शांत रहना चाहिए।
- इम्पल्सिव बिहेवियर होना
एडीएचडी जैसी बीमारी से पीड़ित बच्चे दूसरों की बात को बहुत ही जल्दी बीच में ही काटने लग जाते हैं और बिना सोचे समझे बहुत ही जल्दी प्रतिक्रिया देने लग जाते हैं। इस दौरान बच्चे कुछ भी करने पर अपनी बारी का बिल्कुल भी इन्तजार नहीं करते हैं और तुरंत उस काम को कर डालते हैं। दरअसल, बच्चों में उत्पन्न यह आदतें आगे चलकर सामाजिक रिश्तों और सुरक्षा दोनों के लिए एक बहुत ही बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है।
- भावनात्मक असंतुलन होना
दरअसल, इस समस्या के दौरान बच्चे एक छोटी सी ही बात पर गुस्सा या फिर नाराज हो सकते हैं। आम तौर पर उन को इस दौरान अपना गुस्सा कंट्रोल करना या फिर अपने रोने को संभालना काफी ज्यादा दिक्कत भरा हो जाता है। दरअसल, इससे उनके रिश्ते काफी ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
निष्कर्ष:
अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) एक न्यूरो डेवलपमेंट यानी कि दिमाग के विकास से जुड़ी हुई एक बीमारी है, जो ज्यादातर छोटे बच्चों के दिमाग को प्रभावित करती है। दरअसल, छोटे बच्चों में ऐसे कई लक्षण देखने को मिल सकते हैं, जो एडीएचडी का संकेत देते हैं, जिसमें ध्यान न लगना और जल्दी भटक जाना, हाइपरएक्टिविटी होना, इम्पल्सिव बिहेवियर होना, भावनात्मक असंतुलन होना, पढ़ाई और दोस्ती में चुनौतियां होना जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। ज्यादातर माता -पिता अपने काम में व्यस्त होने की वजह से बच्चों में उत्पन्न ऐसी समस्यायों को नज़रअंदाज कर देते हैं, जिसकी वजह से बच्चों के दिमाग के विकास में काफी ज्यादा रूकावट पैदा हो जाती हैं। इसलिए, इस तरह की समस्या को नज़रअंदाज करने की बजाए, इसके लक्षणों की पहचान कर समस्या का समाधान करना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, ताकि बच्चों के दिमाग का विकास अच्छे से हो सके। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और दिमाग से जुड़ी एडीएचडी जैसी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही मानस अस्पताल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।