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What are the topmost signs that your child needs behavioral therapy

बच्चों के व्यवहार में नज़र आए परिवर्तन, तो इसे न करें नज़रअंदाज़ !

August 2, 2023

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अकसर हम बच्चों में कुछ ऐसे बर्ताव देखते है जिसमे उनके द्वारा बहुत अलग-अलग तरह का बर्ताव किया जाता है, तो अगर आपके बच्चों में भी ऐसे कुछ बर्ताव नज़र आए जिसमे वो अपने रोजाना के बर्ताव से कुछ अलग ही व्यव्हार लोगों के सामने करते है तो हो जाए सावधान और बिना देर किए अपने बच्चे को डॉक्टर के पास जरूर लेकर जाए। तो जानते है की आखिर कौन-से लक्षण आपके बच्चों में नज़र आने पर आपको डॉक्टर का चयन करना चाहिए ;

बच्चों में क्या है एडीएचडी (ADHD) ?

  • एडीएचडी एक न्यूरो डेवलेपमेंटल डिस्आर्डर होता है। इसमें बच्चा अपने व्यवहार को नियंत्रित नहीं कर पाता। 
  • जो लोग अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) से जूझते है, उनके मस्तिष्क के विकास और मस्तिष्क की गतिविधि में सामान्य व्यक्ति के मुकाबले काफी अंतर होता है, आम भाषा में समझा जाए तो मस्तिष्क का विकास ठीक से नहीं हो पाता।

अगर आपके बच्चा का खुद के व्यव्हार में नियंत्रण नहीं है तो इसके लिए आपको बिना देर किए लुधियाना में बेस्ट साइकेट्रिस्ट के संपर्क में आना चाहिए।

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बच्चों में एडीएचडी (ADHD) के क्या कारण हो सकते है ?

  • एडीएचडी कारणों की बात करें तो इसका पहला कारण जेनेटिक है।
  • दिमाग में केमिकल का इनबैलेंस होना भी इसके कारणों में शामिल है। 
  • प्रेग्नेंसी के दौरान मां का तनाव में होना। 
  • जन्म से पहले बच्चे को जन्म देना। 
  • प्रेग्नेंसी के दौरान शराब या सिगरेट का सेवना करना। 
  • प्रेग्नेंसी के दौरान पौष्टिक खाने का आभाव आदि इसके कारणों में शामिल है।

बच्चों में क्या लक्षण है एडीएचडी (ADHD) के?

  • पढ़ते समय या खेल में आसानी से ध्यान भंग हो जाना। 
  • सामने-सामने बात करने पर ऐसा प्रतीत होना जैसे आपकी बात पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 
  • समझी हुई बातों या कार्यों में गलती करना। 
  • महत्वपूर्ण कार्यों को भूल जाना।
  • ऐसे कार्यों को करने में आना-कानी करना, जिसमें एकाग्र होकर बैठना हो। 
  • लगातार चलते रहना जैसे कि शरीर में मोटर लगी हो। 
  • बैठे होने पर भी बदन का हिलना-डुलना और हाथ-पैरों का चलते रहना।
  • अत्यधिक दौड़ना, कूदना या फर्नीचर पर चढ़ना, जिसकी इजाजत न हो। 
  • अपनी बारी आने का इंतजार न कर पाना। 
  • ट्रैफिक का ध्यान ना रखते हुए दौड़ते जाना।  
  • दूसरों के वार्तालाप में बाधा डालना आदि। 
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यदि आपमें ये लक्षण किसी गंभीर चोट के कारण और ज्यादा नज़र आ रहें है, तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में मानसिक रोग विशेषज्ञ का चयन करना चाहिए।

बच्चों में एडीएचडी (ADHD) का इलाज क्या है?

  • इसके इलाज की बात करें तो इसमें मेडिकेसन, काउंसलिंग और दवाइयों की मदद से बच्चे के दिमागी विकार को ठीक किया जा सकता है। 
  • दवाइयों का भी इसमें उपयोग किया जाता है ताकि मस्तिष्क ध्यान देने और अधिक आत्म-नियंत्रण का उपयोग करने की क्षमता को सक्रिय कर सकें।
  • व्यवहार चिकित्सा में चिकित्सक बच्चों को सामाजिक, भावनात्मक और नियोजन कौशल विकसित करने में मदद कर सकते है। 
  • अभिभावक कोचिंग, के माध्यम से बच्चों के प्रति माता-पिता के व्यवहार को बदलने की कोशिश की जाती है। क्योंकि अक्सर देखा गया है कि ऐसे बच्चों के साथ माता-पिता और अन्य परिवार वाले ठीक से व्यवहार नहीं करते।
  • स्कूल का समर्थन, व शिक्षक एडीएचडी वाले बच्चों पर ज्यादा ध्यान दे सकते है और उन्हें हमेशा खास और सभी के साथ घुलने-मिलने में मदद कर सकते है। 
  • लेकिन इसका इलाज जरूरी है की समय पर किया जाए नहीं तो बच्चे का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
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बच्चों के दिमागी इलाज के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

आपके बच्चे का दिमागी इलाज अच्छे से हो सकें तो इसके लिए आपको मानस हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। इसके अलावा इसके कारणों व लक्षण को जानने के बाद इलाज में कृपया देरी न करें।