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बच्‍चों के साथ बात करते वक्त भूलकर भी किन बातों को नहीं बोलना चाहिए? बच्चों पर पड़ सकता है बुरा प्रभाव!

February 14, 2026

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दरअसल, छोटी उम्र में बच्चे बहुत ही ज्यादा मासूम और दिल के काफी ज्यादा सच्चे और अच्छे होते हैं। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में बच्चों को आप जो भी सिखाते या फिर उनको जो भी बोलते हैं, वो आगे चलकर या फिर बड़े होकर व्ही बन जाते हैं। छोटी उम्र में बच्चों को समझना और समझाना बहुत ही ज्यादा आसान काम होता है। दरअसल, इस बात को लगभग सभी जानते हैं, कि छोटे बच्चों का दिमाग एक खाली किताब की तरह होता है, जिस में आप जो भी चाहो वो आसानी से भर सकते हैं। दरअसल, इस दौरान, आप उनके सामने जैसा बर्ताव करते हैं, वो वैसे ही दूसरों के साथ भी बर्ताव करने लग जाते हैं। 

आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में उन्हें असली दुनिया के लिए तैयार करने के लिए लगातार कोशिशों और कुछ सावधानियों की काफी ज्यादा जरूरत होती है। इस दौरान आप बच्चे के सामने जिस बोली का इस्तेमाल करते हैं, वह बड़े होकर उनके बर्ताव में झलकने लग जाती है। अगर आप दूसरों के सामने काफी ज्यादा नम्रता वाली बोली का इस्तेमाल करते हैं, तो इस दौरान आपका बच्चा भी दूसरों के सामने एक अच्छी और प्यार भरी बोली का इस्तेमाल करता है। इसलिए, ज्यादातर माता-पिता को अपने बच्चों के सामने कुछ अच्छे उदाहरण पेश करने की काफी ज्यादा जरूरत होती है, ताकि उन बच्चों में सही वैल्यूज़ को डाला जा सके और साथ में उन को दूसरों के प्रति आदर भाव वाली भाषा का उपयोग करने के लिए बढ़ावा दिया जा सके। दरअसल, आपको बता दें, कि विशेष तौर पर बच्चों पर शब्दों का स्थायी प्रभाव हो सकता है। क्योंकि, विशेषज्ञों का मानना है, कि यह एक प्रभावशाली उम्र होती है, जिसमें बच्चे को जो सिखाया जाये, वो आसानी से सीख जाता है। इसलिए, अक्सर बोला जाता है, कि बच्चों की छोटी उम्र में अक्सर कुछ भी बोलते वक्त काफी ज्यादा सोच विचार करना चाहिए, यानी कि जो भी बोलना चाहिए वो सोच समझ कर ही बोलना चाहिए। 

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आम तौर पर, इस पर विशेषज्ञों का कहना है, कि बड़े क्या कहते और कैसे बोलते हैं, यह एक बच्चे की छोटी उम्र से बढ़ते और बढ़ते दिमाग को डेवलप करने करने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका को निभाते हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि आपके द्वारा बोले गए शब्द चाहे वो किसी लड़ाई में हों या फिर किसी ख़ुशी वाले माहौल में हों, यह शब्द आपके बच्चे के दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकते हैं और सकारात्मक प्रभाव भी डाल सकते हैं। आम तौर पर, यह दोनों तरीके से बच्चे के दिमाग को प्रभावित कर सकता है। दरअसल, अगर आप चाहते हैं, कि आपका बच्चा बड़े होकर या फिर आगे चलकर आपके और दूसरों के सामने व्यवहार, आदतों और बातचीत करने के तरीके में बिल्कुल ठीक हो, तो इस तरह की स्थिति में आपको अपने बच्चों के सामने शब्दों या फिर कुछ बातों का इस्तेमाल भूलकर भी नहीं करना चाहिए, जिस में बिगड़ा हुआ, ओवर स्मार्ट या फिर स्मार्ट, बेवकूफ या फिर पागल और राजकुमारी या हीरो जैसे शब्द या फिर बातें शामिल हो सकती हैं। इससे बच्चे के दिमाग पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, बच्चों के सामने किसी भी शब्द का इस्तेमाल अक्सर सोच समझकर ही करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

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बच्‍चों के साथ बात करते वक्त भूलकर भी इन बातों को नहीं बोलना चाहिए!

अगर आप चाहते हैं, आपका बच्चा बड़ा होकर आपकी और दूसरों की दिल से इज्जत करे और अच्छी बातों को बोले, तो आप इस दौरान उन के सामने निम्नलिखत बातों को भूलकर भी नहीं बोलना चाहिए, जैसे कि 

  1. बिगड़ा हुआ

सभी लोगों को छोटे बच्चों के सामने बोलते हुए अपने शब्दों का काफी ध्यान रखना चाहिए। आम तौर पर, इस दौरान माता-पिता या फिर घर के किसी भी सदस्य को छोटे बच्चों के सामने कई शब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए जैसे कि खराब या फिर बिगड़ा हुआ। दरअसल, हो सकता है, कि ज्यादा दिमाग या फिर बड़ी उम्र न होने कि वजह से वह आपके इन शब्दों को बिल्कुल भी न समझ पाए और उनको इससे काफी ज्यादा बुरा लगे। तो, इस तरह की स्थिति में उनके सामने इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल उनकी सेल्फ-एस्टीम को ठेस पहुंच सकता है और इसकी वजह से वह छोटा सा बच्चा अपने मन में बहुत सी बातों को दबा सकता है। इससे उनकी मानसिक स्थिति पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ सकता है। 

  1. स्‍मार्ट या फिर ओवर स्मार्ट 
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दरअसल, यह माना कि दूसरे या फिर अपनों के सामने अपने बच्चे की इंटेलिजेंस की तारीफ करना और साथ में उनके आईक्यू लेवल की तारीफ़ करना काफी ज्यादा अच्छी बात होती है। पर, विशेषज्ञों का इस पर कहना है, कि ज्यादातर अपने बच्चों को दूसरे व्यक्तियों या फिर अपने लोगों के सामने स्मार्ट बोलने से उनकी असली मेहनत छूट जाती है। आपको बता दें, कि इसकी वजह से बच्चा ओवर कॉन्फिडेंस हो जाता है और साथ में उनको इस बात का जबरदस्ती एहसास दिलाया जाता है, कि वह एक अलग दिमाग के साथ पैदा हुए हैं और वह हर बातों में हमेशा ठीक होते हैं। 

निष्कर्ष: बचपन में बच्चे एक खाली किताब की तरह होते हैं, जिसमें जिस में आप जो भी चाहो वो आसानी से भर सकते हैं। अगर आप चाहते हैं, कि आपका बच्चा बड़ा होकर व्यवहार, आदतों और बातचीत करने के तरीके में बिल्कुल ठीक हो, तो ऐसे में आपको अपने बच्चों के सामने बिगड़ा हुआ, स्मार्ट, बेवकूफ या फिर पागल और राजकुमारी या हीरो जैसी बातों का इस्तेमाल भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इससे बच्चे की मानसिक स्थिति और आने वाला भविष्य प्रभावित हो सकता है। इस के बारे में ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही मानस अस्पताल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।