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आखिरकार क्यों होती है एडीएचडी से पीड़ित बच्चों को सोने में परेशानी? डॉक्टर से जानें, एडीएचडी और नींद के बीच के संबंध के बारे में!

April 10, 2026

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दरअसल, जब कोई बच्चा दिन में सभी कामों को करने के बाद, जब अपने बिस्तर पर जाता है, तो ऐसे में माता-पिता की उम्मीद होती है, कि उनका बच्चा कुछ ही मिनटों बाद एक गहरी नींद में सो जाएगा। पर, जो बच्चे एडीएचडी जैसी समस्या से पीड़ित होते हैं, उनके लिए रात का समय सबसे ज्यादा कठिन होता है। क्योंकि, इस तरह की समस्या में ज्यादातर बच्चों को नींद नहीं आती है। दिनभर भागदौड़ करने के बावजूद उनका दिमाग आराम करने के लिए तैयार नहीं होता है। दरअसल, बच्चों में एडीएचडी होना एक आम समस्या है, जिस में वह ध्यान की काफी कमी होना, जल्दी ध्यान भटक जाना और इंपल्स कंट्रोल की कमजोरी होना जैसी समस्या का सामना करते हैं। दरअसल, रात में सोने की दिक्कत एडीएचडी से पीड़ित बच्चों को विशेष तौर पर, दिमाग में होने वाले बायोलॉजिकल इम्बैलेंस, मेलाटोनिन के देर से निकलने और हाइपरएक्टिविटी की वजह से ही होती है। इस दौरान, उनका दिमाग रात के समय भी एक्टिव रहता है, जिसके कारण वह सो नहीं पाते हैं। इसके अलावा, ड्रग्स और चिंता भी नींद में काफी मुश्किलों को पैदा कर देती है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं 

एडीएचडी और नींद के बीच में क्या संबंध होता है? 

एडीएचडी और नींद के बीच एक बहुत गहरा सबंध माना जाता है, क्योकि जो व्यक्ति एडीएचडी जैसी समस्या से पीड़ित होते हैं, उनमें अक्सर नींद की समस्याएं देखी जाती हैं। इस पर डॉक्टर का कहना है, कि जो बच्चे ज्यादातर एडीएचडी जैसी समस्या से पीड़ित होते हैं, दरअसल उन को इस दौरान नींद से जुड़ी कई तरह की समस्यायों का सामना करना पड़ता है, जो की ऐसे में बहुत ही आम होती हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि नींद से जुड़ी यह समस्याएं केवल रात तक ही सीमित नहीं होती हैं, बल्कि यह समस्या दिन में, उनके व्यवहार, पढ़ाई और भावनात्मक संतुलन को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकती है। 

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आखिर एडीएचडी से पीड़ित बच्चों में रात के लक्षण क्या हो सकते हैं? 

दरअसल, एडीएचडी से पीड़ित बच्चों में रात के समय के लक्षण काफी अलग हो सकते हैं, जिसमें कुछ लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं: 

  1. इस समस्या का सबसे आम लक्षण नींद न आना। 
  2. ऐसे में, बार-बार अपने पैरों को हिलाते रहना। 
  3. रात के समय नींद न आने पर बार-बार जाग जाना। 
  4. रात के समय बुरे सपनों का आना और बिस्तर पर पड़े करवटों को बदलते रहना। 
  5. ऐसे में, कई बच्चों में देर से सोने-जागने का फेज़ होता है, जिसमें वह देर रात तक जागना और सुबह उठने में दिक्कत महसूस करना शामिल है। 
  6. सोते समय बच्चों के दिमाग में दौड़ते हुए विचार चलना, यह विचार इतने ज्यादा तेज होते हैं, कि उनके दिमाग को शांति नहीं मिल पाती। 
  7. ऐसे में, कुछ बच्चों में रेस्टलेस लेग सिंड्रोम जैसे लक्षण नजर आते हैं, जिसमें पैरों में झुनझुनी या फिर खिंचाव महसूस करना। 
  8. वहीं कुछ बच्चों में नींद न आने की बजाए, काफी नींद आना। इसका कारण दवाइयों के साइड इफेक्ट, डिप्रेशन और तनाव हो सकता है। 
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एडीएचडी में नींद खराब होने के मुख्य कारण क्या हो सकते हैं? 

आम तौर पर, एडीएचडी जैसी समस्या में, नींद खराब होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. ध्यान न देना और हाइपरएक्टिविटी से नींद का प्रभावित होना।
  2. सोते वक्त स्क्रीन टाइम ज्यादा होना। 
  3. शाम के दौरान काफी ज्यादा हाइपर एक्टिव रहना। 
  4. कैफीन या फिर शुगर का काफी ज्यादा सेवन करना। 
  5. बच्चों में स्लीप एपनिया या जोर से खर्राटे लेने की समस्या होना। 
  6. हाइपरएक्टिविटी अधिक होने के कारण नींद न आने की दिक्कत होना। 

एडीएचडी पर स्टडी का क्या कहना है? 

NIH की एक रिपोर्ट के अनुसार, जो बच्चे एडीएचडी जैसी समस्या से पीड़ित होते हैं, दरअसल उन बच्चों में नींद की समस्या के बहुत से वैज्ञानिक और व्यवहारिक कारण

शामिल होते हैं। यह समस्या विशेष तौर पर, दिमाग के विकास और जेनेटिक कारणों से जुडी हुई होती है, जो एक न्यूरोलॉजिकल विकार होता है, ना केवल बच्चों का शरारती व्यवहार होता है। दरअसल, दिमाग में डोपामाइन और नॉरपेनेफ्रिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का इम्बैलेंस इसके मुख्य कारणों में शामिल होता है, जो अक्सर सतर्कता और सोने की साइकिल को कंट्रोल करता है। इसके इलावा, एडीएचडी समस्या की वजह से बच्चों में कुछ ऐसी आदतें आ जाती हैं, जो बच्चों को सोने नहीं देती हैं, जिसमें तेज़ी से सोचना, सोते समय स्टिम्युलेटिंग एक्टिविटी से ध्यान न भटकना और मेलाटोनिन हार्मोन का देर से रिलीज़ होना शामिल होता है। 

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एडीएचडी से पीड़ित बच्चों को नींद की समस्या से किस तरीके से बचाया जा सकता है? 

दरअसल, एडीएचडी से पीड़ित बच्चों को नींद की समस्या से निम्नलिखित तरीको से बचाया जा सकता है, जैसे कि डॉक्टर का कहना है, कि इस दौरान सबसे ज्यादा जरूरी है, सोने का एक जैसा रूटीन, तो चलिए जानते हैं: 

  1. हर रात एक ही वक्त पर और एक ही क्रम में सोने की तैयारी करना, जिस में समय पर किताब पढ़ना और शांत माहौल शामिल होता है। 
  2. इस दौरान कमरे में हल्का अँधेरा, ठंडा और शांत रखें।
  3. सोने से 2 घंटे पहले स्क्रीन देखना बंद कर दें। 
  4. बेडरूम में खिलौने, खाने-पीने की चीजें या फिर खेलने की कोई भी एक्टिविटी न हों। ऐसे में, उनका ध्यान सिर्फ आराम पर होगा। 

निष्कर्ष: एडीएचडी से पीड़ित बच्चों में नींद की समस्या होना काफी आम है। वक्त रहते समस्या के लक्षणों की पहचान करना आवश्यक है, ताकि समस्या को समय पर कंट्रोल किया जा सके। ऐसे में, बच्चों की नींद में सुधार करने के लिए सही डेली रूटीन, शांत वातावरण और डॉक्टर की निगरानी आवश्यक होती है। इस के बारे में ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही मानस अस्पताल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।