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Woman consulting doctor at Manas Hospital for mental health issues.

आखिर क्यों करने लगते हैं लोग खुद से बातें? डॉक्टर से जानें इसके प्रमुख कारणों के बारे में!

April 14, 2026

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यह तो हम सभी जानते हैं, कि खुद से बात करना एक आम बात होती है। लगभग सभी लोग अकेले में खुद से बात करते हैं और मन ही मन हस्ते या फिर कुछ न कुछ सोचते रहते हैं। आम तौर पर, अक्सर ही यह देखने को मिलता है, कि हम में से कुछ लोग चलते-फिरते, कोई भी काम करते-करते या फिर अकेले कहीं पर आराम से बैठकर खुद से बात करते हुए नजर आते हैं। दरअसल, एक तरीके से लोग ऐसा करके अपने मन को ख़ुशी और अकेलापन दूर करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, कई बार लोगों की इस आदत को देख कर हम को काफी ज्यादा अजीब या फिर असामान्य लग सकता है, जिसकी वजह से हम काफी सोच में पड़ सकते हैं। दरअसल, हम में से ज्यादातर लोग सोचने लग जाते हैं, कि कहीं यह व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार तो नहीं है या फिर कहीं इस को कोई सदमा तो नहीं लगा है, जिसकी वजह से यह ऐसा कर रहा है। 

मनोविज्ञान का इस पर कहना है, कि अक्सर एक व्यक्ति का खुद से बात करना मानसिक बीमारी का संकेत नहीं होता है, असल में यह एक इंसानी दिमाग की स्वाभाविक और काफी ज्यादा उपयोगी प्रक्रिया भी हो सकती है। इसके अलावा, खुद से बात करना हमारे मानसिक ढांचे, इमोशनल बैलेंस और फैसला लेने की क्षमता से जुड़ा हुआ होता है। तो सभी चीजों को देखते हुए ऐसा मानना या फिर कहना गलत होगा कि खुद से बात करना कोई मानसिक बीमारी का लक्षण या फिर व्यक्ति मानसिक तौर पर बीमार होता है। अक्सर हम सब भी कभी न कभी खुद से बात करते हुए पाए जाते हैं, जो कि काफी आम है, पर जब हम किसी और को ऐसा करते हुए देखते हैं, तो हम परेशानी में आते हैं और उसके बारे में बार- बार सोचने लग जाते हैं। अक्सर लोग अपने तनाव और अपनी समस्याओं का हल करने के लिए ही खुद से बात करने लग जाते हैं। वह इस दौरान एक गहरी सोच में चले जाते हैं। दरअसल, खुद से बात करने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जिसमें अपनी सोच को व्यवस्थित करना, भारी चिंता को दूर करना, अपने इमोशन पर कंट्रोल पाना, अपने अकेलेपन को दूर करना और अपनी याद रखने की क्षमता बढ़ाना जैसे कुछ कारण शामिल हो सकते हैं। इस मामले में, किसी भी तरह की गंभीरता का एहसास हो, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आइये इस लेख के मध्यान से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

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आखिर खुद से बात करना क्या होता है? 

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि खुद से बात करना एक मानसिक प्रक्रिया होती है, जिसमें व्यक्ति अपने तनाव को कम करने के साथ- साथ अपनी समस्याओं का हल करने के लिए भी खुद से बात करते हैं। इस दौरान व्यक्ति अपने सामने अपने ही विचारों को शब्दों के रूप में सामने लाते हैं और उनसे बातें करने लग जाते हैं। दरअसल, खुद से बात करने के दो प्रकार होते हैं, जिसमें से पहला होता है, आंतरिक रूप से बात करना और दूसरा होता है, बाहरी रूप से बात करना: 

  1. आंतरिक: दरअसल, मन ही मन कुछ न कुछ सोचना और उसके बारे में राय बना लेना ही आंतरिक रूप से बात करना होता है। 
  2. बाहरी: किसी चीज़ के बारे में सोचकर उसे कहना और अपना जवाब तैयार करना ही बाहरी रूप से बात करना होता है। 
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आखिरकार खुद से बात करने के प्रमुख कारण क्या हो सकते हैं? 

आम तौर पर, खुद बात करने के प्रमुख कारण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. अपनी सोच को व्यवस्थित करना

दरअसल, जब कभी भी आप खुद से बात करने का प्रयास करते हैं, तो आप इस दौरान आप अपने मन में चल रहे विचारों को व्यवस्थित करते हैं। आम तौर पर, इस तरह की प्रक्रिया दरअसल हमारे दिमाग को आगे का फैसला लेने के लिए तैयार करती है। खुद से बात करके चीज़ों और विचारों की प्लानिंग करना, दरअसल पढ़ाई या फिर किसी भी तरह की योजना बनाते वक्त किसी भी समस्या का हल ढूंढते वक्त काम

आती है। मेडिकल भाषा में कहा जाए, तो यह हमारे कॉग्निटिव प्रोसेसिंग को बेहतर बनाने में हमारी काफी ज्यादा सहायता करती है। 

  1. अपनी चिंता को कम करना 

दरअसल, अक्सर ही यह देखने को मिलता है, कि जो लोग ज्यादातर अपने आप से बात करते हैं, वो पहले से ही किसी तनाव की स्थिति में फंसे हुए होते हैं और उस से निपटने की कोशिश में होते हैं। आम तौर पर, ज्यादातर लोग तनावपूर्ण परिस्थितियों के दौरान अपनी बातों को किसी और को बताने से अच्छा अपने आप से ही बातें करते हैं और इस दौरान अपने मन को शांत करते हैं। सब ठीक हो जाएगा, सब मान जाएंगे, जो होगा अच्छा ही होगा, में यह कर सकता हूँ जैसे शब्दों को अपने मन में बार-बार दोहराना दिमाग को काफी ज्यादा शांति प्रदान करता है। दरअसल, इससे हमारे शरीर में तनाव हार्मोन कम होता है और दिमाग को शांति प्राप्त होती है। 

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निष्कर्ष: खुद से बात करना कोई गलत नहीं होता है और न ही यह किसी मानसिक बीमारी का संकेत होता है। कभी- कभी खुद से बात करना, तनाव या फिर किसी सोच के दौरान अपने आप से बात करना आम होता है, पर हद से ज्यादा खुद से बात करना और एक ही बात पर बार-बार सोचते रहना, बोलना एक चिंता का विषय हो सकता है। इस दौरान मरीज को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। किसी बात को लेकर अपने परेशान मन को शांत करने और तनाव मुक्त करने के लिए लोग खुद से बात करना शुरू कर देते हैं। एक नॉर्मल सेल्फ-टॉक को रोकने की बजाए इस को एक पॉजिटिव दिशा देना बेहतर होता है। इस के बारे में ज्यादा जानने के लिए आपको दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप मानस हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।