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Suicidal person sitting alone with phone, seeking help for loneliness and addiction.

आखिर तनाव में बार-बार मीठा खाने की क्रेविंग क्यों होती है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

April 17, 2026

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आज के समय में ज्यादातर लोग काम के चलते काफी ज्यादा व्यस्त रहते हैं और चाहकर भी अपनी सेहत का उतना अच्छे तरीके से ध्यान नहीं रख पाते हैं, जितना कि उनके लिए महत्वपूर्ण होता है। इसी के चलते लोगों को तनाव के साथ- साथ मोटापे जैसी गंभीर समस्या का भी सामना करना पड़ता है। आज लोगों में तनाव और मोटापे जैसी समस्या को काफी आम देखा जा सकता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि ऑफिस में बहुत से कामों का प्रेशर, घर की जिमीदारियाँ और इमोशनल समस्याएं या फिर मानसिक थकान का प्रभाव सीधा हमारे दिमाग की सेहत पर पड़ता है। इससे न केवल हमारे रोज का काम प्रभावित होता है, बल्कि इसकी वजह से हमारी शारीरिक सेहत पर भी काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है। इसकी वजह से ज्यादातर लोग तनाव का शिकार हो जाते हैं। 

काम या फिर किसी भी प्रेशर की वजह से लोगों में बढ़ने वाले तनाव के साथ-साथ मीठे का सेवन करने की भी क्रेविंग काफी ज्यादा बढ़ जाती है। आम तौर पर, इस दौरान मीठे का सेवन करने की क्रेविंग को कम करने के लिए लोग ज्यादातर टॉफी, चॉकलेट, पेस्ट्री और साथ में मीठी ड्रिंक्स आदि का सेवन करना काफी ज्यादा पसंद करते हैं। दरअसल, यह चीजें कुछ वक्त तक के लिए मीठे की क्रेविंग को कम कर देती हैं। आम तौर पर, तनाव होने पर बहुत से लोगों को मीठे का सेवन करने की क्रेविंग होती है, इस में किसी भी तरह का कोई भी शक नहीं है। 

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दरअसल, तनाव के कारण लोगों में इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने पर अक्सर ही यह सवाल उठता है, कि आखिर तनाव बढ़ने पर बार-बार मीठा खाने की क्रेविंग क्यों होती है? दरअसल, डॉक्टर का इस पर कहना है, कि तनाव के कारण लोगों में बार-बार मीठा खाने की क्रेविंग विशेष तौर पर, शरीर में तनाव हार्मोन के बढ़ने के कारण होती है। इसके अलावा, तनाव के दौरान शरीर में होने वाले बहुत से हार्मोनल बदलावों की वजह से भी आपको मीठा खाने की क्रेविंग हो सकती है, जिसमें शरीर का फाइट या फिर फ्लाइट रिएक्शन होना, कोर्टिसोल का बढ़ना, डोपामिन का कम होना, सेरोटोनिन और मूड का कनेक्शन होना और नींद की कमी से भूख बढ़ना आदि जैसे हार्मोनल बदलाव शामिल हो सकते हैं। दरअसल, तनाव के दौरान सेरोटोनिन मतलब कि फील गुड हार्मोन को बढ़ाने के लिए दिमाग मीठे की मांग करता है, जिसकी वजह से दिमाग को कुछ वक्त तक के लिए ख़ुशी और काफी ज्यादा अच्छा महसूस होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

तनाव के दौरान मीठा खाने की क्रेविंग होने के कारण 

तनाव में मीठा खाने की क्रेविंग बहुत से लोगों को काफी ज्यादा परेशान भी कर सकती है। डॉक्टर के अनुसार, तनाव के दौरान लोगों को मीठे की क्रेविंग शरीर में होने वाले कई तरह के हार्मोनल बदलावों की वजह से हो सकती है। शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जिसकी वजह से ज्यादातर लोगों को मीठा खाने का मन करता है: 

  1. शरीर का फाइट या फिर फ्लाइट प्रभाव 
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दरअसल, काम के प्रेशर या फिर किसी और कारण की वजह से होने वाले तनाव के कारण हमारा शरीर फाइट या फिर फ्लाइट मोड में चला जाता है, जिसकी वजह से हमारा दिमाग खतरे को भांप लेता है और एड्रिनल ग्लैंड्स से कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे तनाव के हार्मोन को छोड़ने लग जाता है। कोर्टिसोल शरीर को तुरंत एनर्जी देने का काम करता हैं। चूँकि, ग्लूकोज शरीर को तेजी से एनर्जी प्रदान करने में काफी ज्यादा सहायता करता है, इसलिए आपका मन आपको मीठी चीजों का सेवन करने के लिए काफी ज्यादा मजबूर करता है। 

  1. कोर्टिसोल बढ़ना

आम तौर पर, कोर्टिसोल का मुख्य काम शरीर में ब्लड शुगर के लेवल को बढ़ाना होता है, जिसकी वजह से शरीर को फटाफट एनर्जी प्राप्त होती है। हालांकि, तनाव के दौरान शरीर कोर्टिसोल को छोड़ता है, जिसे तनाव हार्मोन भी कहा जाता है। दरअसल, आपको बता दें, कि यह हार्मोन हमारे शरीर में ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ाकर फाइट या फिर फ्लाइट मोड के लिए शरीर को अच्छे तरीके से तैयार करता है। जिसकी वजह से शरीर को तुरंत एनर्जी की जरूरत होती है और इस दौरान हम मीठे का सेवन करने की मांग करते हैं। इससे कुछ वक्त तक के लिए शरीर में तनाव का स्तर कम हो जाता है और दिमाग शांति महसूस करता है। 

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तनाव के दौरान मीठा खाने की क्रेविंग को कैसे कम किया जा सकता है?

तनाव के दौरान लोगों के लिए मीठे का सेवन करने की क्रेविंग को कम करना इतना ज्यादा आसान नहीं होता है, पर आप निम्नलिखित कुछ उपायों के माध्यम से तनाव के दौरान होने वाली इस क्रेविंग को कम कर सकते हैं, जैसे कि 

  1. डेली डाइट में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट से भरपूर बैलेंस्ड डाइट शामिल करें।
  2. नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों को करें। 
  3. इस दौरान मेडिटेशन और गहरी सांस लेने की तकनीकों को अपनाएं।
  4. अच्छी और पर्याप्त नींद प्राप्त करें। 
  5. मीठा खाने का मन करने पर फल, नट्स या फिर डार्क चॉकलेट को ही चुनें। 

निष्कर्ष: तनाव में लोगों को मीठे की क्रेविंग शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से हो सकती है, जैसा कि आपको इस लेख में बताया गया है। तनाव के दौरान मीठा खाने की क्रेविंग एक आम बात हो सकती है, जो आम तौर पर शरीर और दिमाग के बीच होने वाला एक आम प्रभाव होता है। तनाव के दौरान मीठे का सेवन कम करने के लिए आप इस लेख में बताए गए उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस दौरान किसी भी तरह की समस्या महसूस होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही मानस अस्पताल में जाकर इसके विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।