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How to find Out Your Child has ADHD Problem

एडीएचडी (ADHD) क्या है ? जानिए इसके लक्षण, कारण, इलाज व बचाव के तरीके !

September 2, 2023

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ADHD यानि अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर है, और इसकी बात करें तो इस समस्या का सामना करने वाले लोगों में मानसिक विकास होना बंद हो जाता है, और इस तरह की समस्या का सामना बच्चों व वयस्कों दोनों को करना पड़ सकता है, तो चलिए जानते है की कैसे हम इस तरह की समस्या से खुद का बचवा कर सकते है ;

क्या है एडीएचडी (ADHD) ? 

  • ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार यानि अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) एक मानसिक विकार और दीर्घकालिक स्थिति है जो लाखों बच्चों को प्रभावित करती है और अक्सर यह स्थिति व्यक्ति के वयस्क होने तक बनी रह सकती है।
  • ADHD जो कि एक चिकित्सीय स्थिति है। जो लोग एडीएचडी से जूझते है उनके मस्तिष्क के विकास और मस्तिष्क की गतिविधि में सामान्य व्यक्ति के मुकाबले काफी अंतर होता है, आम भाषा में कहा जाए तो मस्तिष्क का विकास ठीक से नहीं हो पाता। 
  • ADHD से जूझने वाले लोगों को ध्यान लगाने, स्थिर बैठने, ठीक से चलने की क्षमता और आत्म-नियंत्रण काफी प्रभावित होता है, साथ ही ऐसे बच्चों को दूसरों से दोस्ती करने और किसी के साथ घुलने मिलने में भी समस्या होती है। 
  • वहीं ऐसे बहुत से बच्चे है, जो कि ADHD से जूझ रहे है, लेकिन उन्हें और उनके माता-पिता को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। 
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एडीएचडी (ADHD) के कारण क्या है ?

  • दिमागी चोट। 
  • जन्म के बाद मस्तिष्क का ठीक से विकास न हो पाना। 
  • बच्चे का जन्म से पहले डिलीवर होना। 
  • जन्म के समय कम वजन का होना। 
  • बच्चे को मिरगी के दौरे का आना।  
  • अगर परिवार में पहले किसी को एडीएचडी की समस्या है तो बच्चे को लाजमी होना।  
  • गर्भावस्था के दौरान मस्तिष्क का ठीक से विकसित न होना। 
  • गर्भावस्था के दौरान शराब और तंबाकू का सेवन करना। 
  • गर्भावस्था के दौरान या कम उम्र में पर्यावरणीय जोखिमों के संपर्क में आना, आदि।
  • अगर आपके अंदर भी इस तरह के कारण नज़र आए तो आपको समय नहीं बर्बाद करना चाहिए, बल्कि समय रहते पंजाब में मानसिक रोग विशेषज्ञ का चयन करना चाहिए। 

एडीएचडी (ADHD) के लक्षण कैसे नज़र आते है ?

  • ADHD से ग्रस्त व्यक्ति हमेशा कल्पना, सपनो और ख्यालों में ही खोया रहता है।  
  • काफी बार तो चीजों को भी भूल जाता है।  
  • फुसफुसाहट या एक दूसरे के कान को ज्यादा भरना। 
  • बहुत अधिक बोलना या बिलकुल न बोलना। 
  • लापरवाह गलतियाँ करें या अनावश्यक जोखिम उठाएं। 
  • मोड़ लेने में परेशानी का सामना करना।
  • दूसरों के साथ मिलने में कठिनाई का सामना करना। 
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अगर आपके बच्चे में भी उपरोक्त लक्षण नज़र आ रहें है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट साइकेट्रिस्ट का चयन करना चाहिए।

एडीएचडी (ADHD) का इलाज क्या है ?

  • इसके इलाज में डॉक्टरों के द्वारा पहले दवाइयों को शामिल किया जाता है और इन दवाइयों का सेवन इसलिए किया जाता है ताकि मस्तिष्क की ध्यान देने, और अधिक आत्म-नियंत्रण का उपयोग करने की क्षमता को सक्रिय किया जा सकें।
  • चिकित्सक बच्चों को सामाजिक, भावनात्मक और नियोजन कौशल विकसित करने में मदद कर सकते है, इसलिए ऐसे में व्यवहार चिकित्सा का चयन डॉक्टर के द्वारा किया जाता है। 
  • कोचिंग के माध्यम से बच्चों के प्रति माता-पिता के व्यवहार को बदलने की कोशिश की जाती है। क्योंकि अक्सर देखा गया है कि ऐसे बच्चों के साथ माता-पिता और अन्य परिवार वाले ठीक से व्यवहार नहीं करते।
  • शिक्षक एडीएचडी वाले बच्चों पर ज्यादा ध्यान दे सकते है और उन्हें हमेशा खास और सभी के साथ घुलने-मिलने में मदद कर सकते है। 
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अगर उपरोक्त कारणों के मुताबिक आप भी एडीएचडी (ADHD) की समस्या से ग्रस्त है, तो इससे बचाव के लिए आपको मानस हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। ताकि आपके बच्चे के मस्तिष्क का इलाज जल्दी शुरू किया जा सकें।  

एडीएचडी (ADHD) से जूझ रहें लोग कैसे करें खुद का बचाव ?

  • इस समस्या का सामना करने वाले लोगों को अपनी दिन की योजना को जरूर बनाना चाहिए। 
  • स्पष्ट बातें निर्धारित करें। 
  • सकारात्मक रहने की कोशिश करें। 
  • निर्देश देना और लेना जरूर सीखें। 
  • हमेशा खुद को उत्तेजित रखें।  
  • लोगों से सामने से बात करें। 
  • सोने का समय निर्धारित करें। 
  • रात के समय में ज्यादा सोचने से बचें।  
  • सामाजिक परिस्तिथियों को समझने की कोशिश जरूर करें।  
  • व्यायाम करें इसमें आप योग और जिम दोनों को अपना सकते है। 
  • जो आपको खाना पसंद हो उसे जरूर खाएं और ध्यान रहे पौष्टिक आहार लें।

सुझाव :

अगर आप दिमागी विकार से जुडी समस्या का सामना कर रहें है, तो इससे बचाव के लिए आपको मस्तिष्क के विशेषज्ञ डॉक्टर का चयन करना चाहिए।