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बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए पेरेंट्स ध्यान रखें ये बातें

May 2, 2025

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माना जाता है की बच्चे माँ बाप का सब कुछ होते हैं ,चाहे वह फिर जैसे मर्जी क्यों न हों ,माना जाता है की बच्चे भगवान का रूप और भगवान की देन होते हैं उनको संभाल के रखना और उनकी देख भाल करना माँ बाप का फर्ज होता है। हालांकि माता पिता बनना इतना आसान नहीं होता है ,उनकी हर छोटी से छोटी चीज को  पूरा करना बोहत आसान होता है जैसे की पौष्टिक भोजन, ठंड में गर्म कपड़े, उचित समय पर सोना। ,अच्छा मानसिक स्वास्थ्य बच्चों को स्पष्ट रूप से सोचने, सामाजिक रूप से विकसित होने और नई कला सीखने की अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त, अच्छे दोस्त और बालिगों के उत्साहवर्धक शब्द बच्चों को आत्मविश्वास, उच्च आत्म-सम्मान और जीवन के प्रति स्वस्थ भावनात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण होता है। सबसे ज्यादा माँ बाप को अपने बच्चे को समझने में कठिनाई होती है ,ज्यादातर माता -पिता बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को पहचान नहीं पाते हैं और इसकी वजह से बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता रहता है। अगर पेरेंट्स सही समय पर बच्चों की मानसिक स्ववास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के संकेत को पहचान लेंगे तो बच्चों को इसका शिकार होने से बचाया जा सकता है। कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे हम अपने बच्चों  को उनके मानसिक स्वास्थ्य  को बनाए रखने के लिए  उनका समर्थन कर सकते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य क्या है

किसी भी देश के विकास के लिए उसके नागरिकों का मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहना बहुत ज़रूरी होता है ,विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मानसिक स्वास्थ्य को “शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक कल्याण की स्थिति और ना केवल बीमारी या दुर्बलता की कमी ” के रूप में परिभाषित किया है। WHO ने मानसिक स्वास्थ्य को मानसिक कल्याण के रूप में परिभाषित किया है, जिसमें व्यक्ति अपनी क्षमताओं का एहसास करता है और जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है, सही से काम कर सकता है और अपने समुदाय में योगदान करने में भी  सक्षम होता है। इस सकारात्मक अर्थ में, मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्तिगत भलाई और एक समुदाय के प्रभावी कामकाज की नींव कहा जा सकता है

 बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखें

 

 

                     1. अपने बच्चे के साथ और अकेले में विशेष समय बिताएं

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माता पिता को अपने बच्चों के साथ ज्यादा से जायद समय बिताना चाइये और उनकी बातों को सुनना चाहिए ताकि वह आपके साथ खुल सके सब कुछ आपको बता सके अपने अंदर के डर या अपनी न कहनी वाली बातों को आपके साथ साझां कर सके। जब आप अपने बच्चे के साथ अकेले में समय बिताते हैं तो कोशिश करे उनके साथ ज्यादा दोस्ती करने की ताकि वह कुछ भी कहने से आपको डरे न या अपनी बात को खुल कर न कहे सके तो उनके साथ अकेले में  बात करे उनको सही गलत में फर्क बताये और उनकी बातों को नजर अंदाज न करें। उनकी पूरी दिचर्या पूछे, के उनका दिन केसा गया क्या हुआ और क्या नहीं उनको सही बातों की शिक्षा दें। 

                     2 . शरीर की छवि से जुड़ी समस्याओं से निपटना  के  में बात करें

यौवन के बारे में बात करें :अपने बच्चे को समझाएं कि मानव शरीर कैसे काम करता है और यौवन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसका अनुभव हर कोई करता है। उनके शरीर में भी बदलाव आयेगें जिससे उनको डरने की जरूरत नहीं होती है।

  1. सोशल मीडिया पर मौजूदगी को सीमित रखें

यह बोहत ही जरूरी होता है अपने बच्चे पर ध्यान देना की आपका बच्चा सोशल मीडिया पर और टेलीविज़न पर क्या देख रहा है उसको समझाए की क्या देखना चाइये और क्या नहीं बच्चों की सोशल मीडिया पर मौजूदगी को कम करे ताकि वह आपके  साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिता सके और ध्यान रखें किन आपका बचा क्या देखना ज्यादा पसंद कर रहा है उसको उस चीज के बुरा औरअच्छा प्रभाव बताएं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि बच्चे सोशल मीडिया पर जो कुछ भी देखते हैं, उससे प्रभावित हो रहे हैं। ट्रेंडी बनने की कोशिश में, बच्चे असुरक्षित और असुरक्षित हो जाते हैं, और उन्हें बॉडी शेमिंग का सामना करना पड़ सकता है। तो आप उसको इसके बारे में जानकारी दें। 

  1. बच्चों को बिना शर्त प्यार करें

माता पिता को चाइये की अपने बच्चों को बिना मांगे प्यार दें और इज्जत दे ताकि वह दूसरों के साथ भी प्यार और इज्जत से ही बात करे। प्यार, सुरक्षा और सहमति पारिवारिक जीवन के बीच में होनी चाहिए। बच्चों को यह जानने की ज़रूरत है कि आपका प्यार उनके होने पर ही निर्भर नहीं करता है।

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गलतियों और/या हार की अपेक्षा की जानी चाहिए और उन्हें स्वीकार किया जाना चाहिए। बिना शर्त प्यार और स्नेह से भरे घर में आत्मविश्वास बढ़ता है। और बच्चों मैं भी आत्मविश्वास कमी नहीं रहती है। 

  1. बच्चों की बातों को सुनने के लिए मौजूद रहें

नियमित रूप से पूछें कि वह कैसे हैं, और उन्हें क्या महसूस हो रहा है, ताकि उनकी भावनाओं को सामान्य किया जा सके, और साथ ही उन्हें यह भी पता हो कि अगर वे चाहें तो हमेशा कोई न कोई उनकी बात सुनने के लिए मौजूद है। पता लगाएँ कि ऐसा माहौल कैसे बनाया जाए जहाँ वह खुलकर अपनी बात को आपको कह सकें। उनकी हर छोटी से छोटी बात को समझदारी से सुने और उनको उस बात का हल बातएं और उनको ये उम्मीद दे की वेक कहि पर भी अकेले नहीं हैं उनको भरोसा दिलाएं की आप उनके  साथ हमेशा रहेंगे पर हाँ उनको सही और गलत में फर्क बताएं।

 

 

 

 

  1. बच्चों के व्यवहार को समझें

बच्चे के व्यवहार को समझे की वह क्या सोचता है किस तरिके से सोचता है ,और क्या करना चाहता है। सही सोचाता है तो उसका साथ दें और वह गलत की और जा रहा है तो उसको प्यार से समझाएं की ये गलत है उसका सही और गलत बताएं। हर माता-पिता को अपने बच्चे का व्यवहार अच्छी तरह से ध्यान रखना चाहिए। अगर आपके बच्चे के व्यवहार में अचानक से कोई बदलाव दिखता है, तो इसे भूलकर भी नजरअंदाज न करें, ऐसा करने से आपका बच्चा गंभीर रूप से मानसिक समस्याओं का शिकार भी हो सकता है। ऐसा जरूरी नहीं होता है की हर बार आपके बच्चे में व्यवहार में बदलाव किसी परेशानी का कारण हो लेकिन उसका ध्यान रखने से आप बच्चे को परेशानी की चपेट में जाने से बचा सकते हैं।

  1. दोस्तों और परिवार के साथ जुड़े रहने की कोशिश करें

दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फोन या वीडियो कॉल और ऑनलाइन गेम संपर्क बनाए रखने के नए -नए तरीको को अपनाए।  बच्चो को उनके साथ खुलने का मौका दे उनके दोस्तों के बारें में बात करें,सही और गलत में फर्क बताएं ,उनका साथ दें और उन पर नज़र रखें की आपका बच्चा कैसे लोगो की संगति में बैठ रहा है। उनके दोस्तों से बात करें। 

  1. बच्चो के साथ खेलने के लिए समय निकालें
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बच्चों के लिए, खेल सिर्फ़ मनोरंजन है। हालाँकि, खेल का समय उनके विकास के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि भोजन और अच्छी देखभाल। खेल का समय बच्चों को रचनात्मक बनने और समस्या-समाधान की कला सीखने और आत्म-नियंत्रण सीखने में मदद करता है। अच्छा, साहसी खेल, जिसमें दौड़ना और चिल्लाना भी इसमें शामिल है, यह न केवल मज़ेदार होता है ,बल्कि बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में भी मदद करता है। माता -पिता को अपने बच्चो के साथ खेलना चाहिए ताकि उनकी मानसिक स्थिति ठीक और तन्दरुस्त रहे।

  1. उनके जीवन में शामिल रहें

उनके जीवन और उनके लिए महत्वपूर्ण चीज़ों में रुचि दिखाएँ। इससे न केवल उन्हें अपने महत्व को समझने में मदद मिलती है, बल्कि आपके लिए समस्याओं को पहचानना और उनका समर्थन करना भी आसान हो जाता है।

  1. सकारात्मक दिनचर्या बनाएं

नियमित दिनचर्या, स्वस्थ भोजन और व्यायाम के साथ-साथ रात में अच्छी नींद के लिए ढांचा बनाना बहुत महत्वपूर्ण है – ऐसी दिनचर्या रखने की कोशिश करें जो स्कूल के साथ मेल खाए, भले ही स्कूल की छुट्टियां हों। उनके दोस्तों के बारें में पूछे उनकी तरिफ़ करे जो वो काम करें उसको प्रेरित करें उनको दूसरों को प्यार करना सिखाएं ,उनकी दिनचर्या को अच्छा बनाये। ताकि वह मानसिक तनाव से दूर रह सके। पूजा पाठ जैसे कीर्तन में शामिल करें।

निष्कर्ष

बच्चो को समझें मुश्किल होता है पर अगर उनके साथ सही समय और सही तरिके से वक्त बियाता जाए तो बच्चो को समझना और भी आसान हो जाता है ये समझना की वह क्या सोचते हैं क्या करना कहते है। बच्चो के साथ समय बिताकर उनको सही गलत की जानकारी देना कोनसा काम सही है और कोनसा गलत उनकी दिनचर्या में उनका साथ देना अगर आप भीअपने बच्चों को समझना चाहते हैं और उनकी मानसिक स्वास्थय को सही रखने में आप विशेषज्ञों की सलाह ले सकते हैं और मानस हॉस्पिटल माता पित्त की इस परेशानी का हल करने के लिए ये पुरे पंजाब में प्रसिद्ध है।